Objection regarding two questions in uttar pradesh 69 thousand teacher recruitment exam


एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Up to date Mon, 11 Could 2020 08:44 AM IST

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परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रश्नों के विवाद में उलझ गई है। अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि लिखित परीक्षा में पूछे गए दो सवालों के गलत विकल्पों को परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने सही माना है। आपत्ति दर्ज कराने का समय बीत चुका है, सो अभ्यर्थी इस मामले में न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में भर्ती पर संकट मंडराता नजर आ रहा है।

अभ्यर्थियों का दावा है कि लिखित परीक्षा के दौरान ‘बी’ सिरीज की बुकलेट में सवाल नंबर 74 के पहले विकल्प को पीएनपी से नहीं माना है। सवाल था कि भारत में गरीबी का आकलन किस आधार पर किया जाता है? इस पहला विकल्प था, ‘परिवार का उपभोग व्यय’ और पीएनपी ने इसे ही सही माना है जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि तीसरा विकल्प यानी ‘प्रति व्यक्ति व्यय’ सही होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि एनसीईआरटी की कक्षा-11 की पुस्तक के पेज नंबर 67 के अनुसार तीसरा विकल्प ही सही होना चाहिए।

 इसके अलावा सवाल नंबर 14 को लेकर भी विवाद सामने आया है। सवाल है कि निम्नलिखित में कौन सा एक सामाजिक प्रेरक है। इसके चार विकल्प (आत्मगौरव, प्रेम, भूख, प्यास) दिए गए हैं। इनमें से पीएपी ने पहले विकल्प यानी ‘आत्मगौरव’ को सही माना है, जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि बीटीसी प्रथम सेमेस्टर की किताब के पेज नंबर 106 पर दी गई जानकारी के अनुसार विकल्प दो यानी ‘प्रेम’ सही होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि पीएनपी ने अपनी ही किताब में दिए गए तथ्यों का नकार दिया है।

परीक्षा नियामंक प्राधिकारी की ओर से जारी बेसिक शिक्षा परिषद में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा की उत्तर कुंजी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि प्रश्न संख्या 30, 31 और 33 के उत्तर सही होने के बावजूद उन्हें डिलिट किया गया है।  अभ्यर्थियों ने सरकार से एक बार फिर विचार कर संशोधित उत्तर कुंजी जारी करने की मांग की है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज द्वारा 9 मई को सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2019 की जारी संशोधित अंतिम उत्तर कुंजी में बुकलेट सीरीज के हिंदी विषय से संबंधित प्रश्न संख्या 30, 31 और 33 को निरस्त करते हुए जारी किया गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि तीनों प्रश्न व उनके विकल्प में किसी प्रकार की कोई त्रुटि नहीं है व इनका बिल्कुल सही उत्तर भी विकल्प में मौजूद है।  प्राधिकारी द्वारा प्रथम बार घोषित उतर कुंजी में विकल्प को सही भी घोषित किया था अभ्यर्थियों का आरोप है कि  तीनों सही प्रश्नों को डीलीट करके प्राधिकारी ने अनावश्यक विवाद को जन्म देकर मेधावी अभ्यर्थियों के हितों अनदेखी की है।

69 हजार शिक्षक भर्ती के लिए हुई परीक्षा में सामान्य के लिए न्यूनतम अर्हता अंक 65 फीसदी और ओबीसी एवं एससी श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अर्हता अंक 60 फीसदी निर्धारित किए गए थे। वहीं, पिछली बार हुई 68500 शिक्षक भर्ती में सामान्य के लिए न्यूनतम अर्हता अंक 45 फीसदी और ओबीसी एवं एससी के लिए 40 फीसदी निर्धारित किए गए थे। इसमें जिन अभ्यर्थियों को न्यूनतम अर्हता या उससे अधिक अंक मिले थे, सबका चयन हो गया था। 

परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रश्नों के विवाद में उलझ गई है। अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि लिखित परीक्षा में पूछे गए दो सवालों के गलत विकल्पों को परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने सही माना है। आपत्ति दर्ज कराने का समय बीत चुका है, सो अभ्यर्थी इस मामले में न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में भर्ती पर संकट मंडराता नजर आ रहा है।

अभ्यर्थियों का दावा है कि लिखित परीक्षा के दौरान ‘बी’ सिरीज की बुकलेट में सवाल नंबर 74 के पहले विकल्प को पीएनपी से नहीं माना है। सवाल था कि भारत में गरीबी का आकलन किस आधार पर किया जाता है? इस पहला विकल्प था, ‘परिवार का उपभोग व्यय’ और पीएनपी ने इसे ही सही माना है जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि तीसरा विकल्प यानी ‘प्रति व्यक्ति व्यय’ सही होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि एनसीईआरटी की कक्षा-11 की पुस्तक के पेज नंबर 67 के अनुसार तीसरा विकल्प ही सही होना चाहिए।

 इसके अलावा सवाल नंबर 14 को लेकर भी विवाद सामने आया है। सवाल है कि निम्नलिखित में कौन सा एक सामाजिक प्रेरक है। इसके चार विकल्प (आत्मगौरव, प्रेम, भूख, प्यास) दिए गए हैं। इनमें से पीएपी ने पहले विकल्प यानी ‘आत्मगौरव’ को सही माना है, जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि बीटीसी प्रथम सेमेस्टर की किताब के पेज नंबर 106 पर दी गई जानकारी के अनुसार विकल्प दो यानी ‘प्रेम’ सही होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि पीएनपी ने अपनी ही किताब में दिए गए तथ्यों का नकार दिया है।



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