• 26, Raoji Bajar
    Juni Indore Indore - 452007

कोरोना वायरसः इंफ़ेक्शन से बचने के लिए क्या करें, क्या न करे

क्या है कोरोना वायरस, क्या हैं इसके लक्षण?

कोरोना वायरस

कोरोना वायरस ने चीन में सैकड़ों लोगों को बीमार कर रखा है और कई लोगों की जान ले ली है.

सांसों की तकलीफ़ बढ़ाने वाले इस वायरस की पहचान वुहान शहर में पहली बार हुई. तेज़ी से फैलने वाला ये संक्रमण निमोनिया जैसे लक्षण पैदा करता है.

चीनी अधिकारियों ने संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए कुछ शहरों को देश के बाक़ी हिस्सों से अलग-थलग करके रखा हुआ है.

ये चीन में नए साल के जश्न का समय है लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में कई प्रमुख कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं.

हम नीचे दिए हुए छह मैप्स और ग्राफिक्स के ज़रिए ये समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि चीन में आख़िर क्या चल रहा है.

कोरोना वायरस
Presentational white space
बीबीसी

1. ज़्यादातर मामले चीन में

चीन में कोरोना वायरस से सैंकड़ों लोग संक्रमित हैं. देश के लगभग बीच में पड़ने वाला हुबेई प्रांत कोरोना वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आने वाले समय में कोरोना वायरस से संक्रमित मामलों के बढ़ने की चेतावनी दे रखी है.

चीनी अधिकारियों ने भी कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कई तरह के कदम उठाये हैं. हुबेई प्रांत के कई शहरों में यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं और आम लोगों से सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनकर रहने के लिए कहा गया है.

चीन की सरकार ने शंघाई की फ़ॉरबिडेन सिटी और ग्रेट वॉल ऑफ़ चीन के कुछ हिस्सों, यहां तक कि कई बौद्ध मंदिरों को भी बंद कर दिया है. ये चीन में नए साल के जश्न का समय है, हफ़्ते भर की छुट्टियां शुरू हो गई हैं, लाखों लोग घर जाने के लिए यात्राएं करते हैं.

और ऐसे समय में प्रतिबंधों की लिस्ट लंबी होती जा रही है. फिलहाल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को 'अंतरराष्ट्रीय आपातकाल' का दर्ज नहीं दिया है. इसकी वजह ये है कि चीन के बाहर कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले कम सामने आए हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस एडहानोम ग़ेब्रेयेसुस ने कहा, "कोई ग़लती न करें. ये मुश्किल समय है. चीन में आपातकाल जैसी स्थिति है."

कोरोना वायरस
Presentational white space
बीबीसी

2. सबसे ज़्यादा प्रभावित हुबेई

हुबेई प्रांत इस महामारी के केंद्र की तरह बन गया है. यहां अभी तक कोरोना वायरस के संक्रमण के 500 से ज़्यादा मामले दर्ज़ किए जा चुके हैं. इस प्रांत के दस शहरों के कम से कम दो करोड़ लोग यात्रा प्रतिबंधों की वजह से प्रभावित हुए हैं. इसमें वुहान शहर भी है जहां सबसे पहले कोरोना की पहचान हुई थी.

वुहान हुबेई प्रांत की राजधानी भी है. माना जा रहा है कि कोरोना वायरस की शुरुआत शहर के सीफूड मार्केट से हुई. यानी वो बाज़ार जहां मछलियां और दूसरे समुद्री जीव खाने के लिए खरीदे जाते हैं. वुहान की आबादी क़रीब एक करोड़ दस लाख की है.

सरकार ने ये शहर बंद कर दिया है. विमान सेवाएं और शहर से बाहर और शहर में दाख़िल होने वाली रेल सेवाएं स्थगित कर दी गई हैं.

वुहान यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नॉलॉजी के एक भारतीय छात्र चॉन्गथान पेपे बिफहोवजित ने बीबीसी से कहा, "मेरी यूनिवर्सिटी में हरेक छात्र के शरीर के तापमान की जांच हर दिन की जा रही है. सब को मास्क दिया गया है. यूनिवर्सिटी का अपना अस्पताल और एंबुलेंस सेवा है."

सोशल मीडिया पर वुहान के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जिनमें स्थानीय अस्पतालों के बाहर लंबी क़तारें देखी जा सकती हैं.

मेडिकल सेवाओं की बढ़ती ज़रूरत को पूरा करने के लिए प्रशासन शहर में हज़ार बिस्तरों वाला का एक नया अस्पताल बना रहा है. हुबेई के सरकारी अख़बार चांग्जीआंग डेली ने कहा है कि ये अस्पताल तीन फ़रवरी तक बनकर तैयार हो जाएगा. अस्पताल के निर्माण कार्य के लिए 35 खुदाई की मशीनें और 10 बुलडोज़र लगाए गए हैं.

कोरोना वायरस
Presentational white space
बीबीसी

3. कोरोना वायरस के मामले

चीन के बाहर कोरोना वायरस के मामलों की अभी तक थाईलैंड, वियतनाम, ताइवान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नेपाल, जापान, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस में पुष्टि हुई है.

दूसरे देश में संदिग्ध मामलों की जांच कर रहे हैं. इनमें ब्रिटेन और कनाडा जैसे देश हैं.

कई देशों ने तो चीन से आने वाले मुसाफिरों की जांच के लिए एयरपोर्ट पर ही एहतियाती कदम उठाए हैं. दुबई और आबू धाबी जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर ऐसा किया जा रहा है.

ताइवान ने तो वुहान से आने वाले लोगों पर पाबंदी लगा दी और अमरीका ने चीन में मौजूद अपने नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है.

कोरोना वायरस
Presentational white space
बीबीसी

4. कोरोना वायरस के लक्षण

कोरोना वायरस बेहद आम होते हैं. इसके शुरुआती लक्षणों से अंदाजा लगाया जा सकता है, सांस लेने में थोड़ी तकलीफ़, खांसी या फिर बहती हुई नाक. लेकिन कोरोना परिवार के कुछ वायरस बेहद ख़तरनाक़ होते हैं जैसे सार्स (सिवियर एक्यूट रेसपिरेटरी सिंड्रोम) और मर्स (मिडल ईस्ट रेसपिरेटरी सिंड्रोम).

वुहान से शुरू हुई इस महामारी के लिए जिम्मेदार विषाणु को नॉवेल कोरोना वायरस या nCoV का नाम दिया गया है. मालूम पड़ता है कि ये कोरोना परिवार की एक नई नस्ल है जिसकी पहचान अभी तक इंसानों में नहीं हो पाई थी.

कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में ऐसा लगता है कि इसकी शुरुआत बुखार से होती है और फिर उसके बाद सूखी खांसी का हमला होता है. हफ़्ते भर तक ऐसी ही स्थिति रही तो सांस की तकलीफ़ शुरू हो जाती है.

लेकिन गंभीर मामलों में ये संक्रमण निमोनिया या सार्स बन जाता है, किडनी फेल होने की स्थिति बन जाती है और मरीज़ की मौत तक हो सकती है. कोरोना के ज़्यादातर मरीज़ उम्रदराज़ लोग हैं, ख़ासकर वो जो पहले से ही पार्किंसन या डायबिटिज़ जैसी बीमारियों से जूझ रहे हों.

लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसीन के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर पीटर पियोट कहते हैं, "अच्छी ख़बर ये है कि कोरोना सार्स विषाणु की तुलना में कम जानलेवा है. अतीत की तुलना में वैश्विक स्तर पर सूचना का ज़्यादा और बेहतर आदान-प्रदान हो रहा है. ये अहम है क्योंकि एक संभावित महामारी से कोई देश अकेले नहीं लड़ सकता है."

इस संक्रमण से निजात पाने के लिए फिलहाल कोई ख़ास इलाज नहीं है. डॉक्टर संक्रमित मरीज़ों का इलाज फिलहाल उनके लक्षण के आधार पर ही कर रहे हैं.

कोरोना वायरस
Presentational white space
बीबीसी

5. बचने के लिए क्या कर सकते हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रभावित इलाके लोगों को पहले से निर्धारित सामान्य एहतियाती उपाय बरतने की सलाह दी है ताकि संक्रमण के ख़तरे को कम किया जा सके. इन उपायों में हाथ साफ़ रखना, मास्क पहनना और खान-पान की सलाह शामिल है.

सांसों की किसी तकलीफ़ से संक्रमित मरीज़ों के क़रीब जाने से लोगों को बचने की सलाह दी गई है. नियमित रूप से हाथ साफ़ करते रहें, ख़ासकर किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के फौरन बाद, पालतू या जंगली जानवरों से दूर रहने की सलाह भी दी गई है. कच्चा या अधपका मांस खाने से मना भी किया गया है.

कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को छींक आने की सूरत में सामने खड़े लोगों को बचाने की सलाह दी गई है. जैसे नाक पर कपड़ा या टिशू रखना, सामने खड़े व्यक्ति से फासला बनाकर रखना, नियमित रूप से साफ़ सफ़ाई जैसे एहतियात बरतने की उम्मीद की जाती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन को ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिनमें क़रीब के लोगों के संक्रमित होने के मामलों की पुष्टि हुई है. इसकी वजह ये भी है कि परिवार में एक व्यक्ति के संक्रमित होने की सूरत में दूसरा उसकी देखभाल करने लगता है. हालांकि अभी तक इसके बाहर होने वाले संक्रमण को लेकर कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं.

कोरोना वायरस
बीबीसी

6. अगर कोई संक्रमित हो जाए तो...

चीन की सरकार ने कोरोना वायरस की महामारी को वही दर्ज़ा दिया है जो अतीत में सार्स की महामारी के समय दिया गया था. इसका मतलब ये हुआ कि देश में जिस किसी की भी इससे संक्रमित होने की पुष्टि होगी, उसे अलग-थलग रखा जाएगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अस्पतालों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए विशेष सलाह जारी की है. इस एडवाइजरी में कहा गया है कि संक्रमित मरीज़ों की फौरन जांच की जानी चाहिए. संक्रमण को देखते हुए मरीज़ को हल्का, मध्यम या गंभीर स्थिति के वर्ग में रखा जाए.

स्वास्थ्य कर्मी खुद संक्रमण का शिकार न हो, इसके लिए सभी एहतियाती उपाय किए जाएं. गाउन, मास्क, दस्तानों के इस्तेमाल के अलावा अस्तपाल में संक्रमित मरीज़ों की गतिविधि पर नियंत्रण करने की भी सलाह दी गई है.

कोरोना वायरस
चीन में कोरोना वायरस के कहर से मरने वालों की संख्या 259 को पार कर गई है. अब तक 22 देशों में इसके संक्रमण के करीब 11800 मामले सामने आए हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे इमर्जेंसी घोषित कर चुका है. भारत में भी अब तक इसके दो मामले सामने आए हैं.

स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए इसे फैलने से रोकना एक बड़ी चुनौती बन गई है. हालांकि, चीन इसे रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है. दुनिया भर में कोरोना वायरस के केस लगातार सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ ने कोरोना वायरस को अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है.


चीन से बाहर 22 देशों में कोरोना वायरस के कई मामलों की पुष्टि हुई है. इन देशों में थाईलैंड, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.

  1. क्या है कोरोना वायरस?
    कोरोना वायरस (सीओवी) का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है. इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है. इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था. डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं. अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है.
  2. क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?
    इसके संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं. यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है. यह वायरस दिसंबर में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था. इसके दूसरे देशों में पहुंच जाने की आशंका जताई जा रही है.
  3. क्या हैं इससे बचाव के उपाय?
    स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए. अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है. खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखें. जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें. अंडे और मांस के सेवन से बचें. जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें.


चीन में इस वायरस के चलते पर्यटकों की संख्या घट सकती है. इसका सीधा असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. पहले ही चीन की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर में है.

कई देशों ने अपने नागरिकों से कोरोना प्रभावित वुहान नहीं जाने के लिए कहा है. कई देशों ने वुहान से आने वाले लोगों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. रूस ने चीन के साथ अपने पूर्वी बॉर्डर को भी बंद कर दिया है.
a>

लगभग 18 साल पहले सार्स वायरस से भी ऐसा ही खतरा बना था. 2002-03 में सार्स की वजह से पूरी दुनिया में 700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. पूरी दुनिया में हजारों लोग इससे संक्रमित हुए थे. इसका असर आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ा था.

केरल में चीन से लौटे जिस छात्र में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्ट हुई है उसकी हालत स्थिर बनी हुई है. ये भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण का पहला मामला है.

लेकिन केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा का कहना है कि मरीज़ को त्रिशूर अस्पताल के आइसोलेशन वॉर्ड ( एकांत वॉर्ड) में रखा गया है और उनकी हालत स्थिर है.

केरल में कोरोना वायरस की मौजूदा स्थिति ये है -

  • केरल में क़रीब 1053 लोगों को निगरानी में रखा गया है
  • 24 सैंपल पुणे भेजे गए
  • 15 सैंपल निगेटिव मिले
  • 1 सैंपल पॉज़िटिव
  • गुरुवार को सात मरीज़ भर्ती
  • अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है 15 लोगों का इलाज

केरल में अधिकारियों ने अलग-अलग अस्पतालों में क़रीब 15 आइसोलेशन वॉर्ड में मरीज़ों को रखा है और क़रीब 1053 लोग निगरानी के तहत हैं.

चीन से फैले इस वायरस की वजह से अब तक क़रीब 170 लोगों की मौत हो चुकी है.

केरल सरकार ने पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी को 24 सैंपल भेजे थे जिसमें से एक पॉज़िटिव निकला जबकि 15 निगेटिव. त्रिशूर के अस्पताल में जांच के लिए दिए गए तीन सैंपल की रिपोर्ट आनी अभी बाकी है.

एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बीबीसी से कहा "लोग समूहों में नहीं आ रहे हैं. वे अलग-अलग हवाई अड्डों पर एक-एक या दो-दो की संख्या में आ रहे हैं लेकिन अगर उनमें बुखार या संक्रमण का कोई भी लक्षण दिखाई दे रहा है तो तुरंत उन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है और फिर निगरानी में रखा जा रहा है."

केरल के कई छात्र चीन में पढ़ाई कर रहे हैं. चीन के वुहान यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मेडिसीन में पढ़ाई कर रहे 56 छात्रों को वापस लाया जाना है.

इससे एक दिन पूर्व डॉ. शैलजा ने छात्रों को वापस लाए जाने पर फ़ैसला केंद्र सरकार पर छोड़ दिया था. हालांकि इन छात्रों को चीन में पहले से ही एकांत में ठहराया गया था. एकांत में रखे जाने के पीछे कारण यह है कि वायरस संपर्क में आने पर तेज़ी से फैलता है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी भारत में पहले कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि की गई है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा "भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण का पहला मामला सामने आने के बहुत पहले से ही हम यह सुनिश्चित करने में लगे हुए हैं कि इसका पूरा निदान और इलाज हो."

डॉ शैलजा ने केरल के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सभी निजी अस्पतालों को भी कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण वाले मरीज़ों को निगरानी में रखने के लिए कहा है.

इस बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि एहतियात के तौर पर ये क़दम उठाए जाने ज़रूरी थे क्योंकि यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकता है. हालांकि उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि केरल पहले भी इस तरह की स्थिति से निपट चुका है.

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन यह बात निपाह वायरस के संदर्भ में कह रहे थे. जिससे हज़ारों लोग संक्रमित हुए थे लेकिन मज़बूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की मदद से उस संक्रमण को महज़ 42 दिनों में नियंत्रित कर लिया गया था.

कोरोना वायरस

बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज़ में वायरोलॉजी प्रोफ़ेसर वी रवि ने बीबीसी को बताया " हमने सार्स के साथ-साथ निपाह वायरस के दौरान भी स्थिति को बहुत अच्छे से संभाला था. जिस भी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण नज़र आए उन्हें पूरी तरह निगरानी में रखा गया और इलाज किया गया."

हालांकि डॉ रवि यह ज़रूर कहते हैं कि संक्रमण के 60 से 70 फ़ीसदी मामलों में संक्रमित व्यक्ति में कोई गंभीर लक्षण (कमज़ोरी) नज़र नहीं आता है. लेकिन बुजुर्गों, मधुमेह पीड़ित और अन्य दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में यह ज़रूर गंभीर तौर पर असर दिखाता है.

डॉ रवि कहते हैं कि अभी जबकि संक्रमण की स्थिति है तो मानक तौर पर अगर किसी में संक्रमण के लक्षण नज़र आ रहे हैं तो उससे एकांत में रखें और इसके साथ ही भीड़-भाड़ वाली जगह पर जाने से परहेज़ करें.

भारत सरकार की एडवाइजरी

केंद्र सरकार ने आज चीन से लौट रहे लोगों के लिए ट्रेवल एडवाइजरी जारी की है. एडवाइजरी के मुताबिक चीन से लौटने पर 14 दिनों तक-

  • घर में अलग थलग रहें
  • अलग कमरे में रहें
  • केवल परिवार से सम्पर्क में रहे. बाहर आने जाने वालों से सम्पर्क न करें.

भारत में चिंता

इसके पहले सरकार ने दिल्ली समेत देश के सात हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की ताकि अगर चीन या हांगकांग से लौटे किसी शख़्स में संक्रमण के असर दिखते हैं तो उसकी तुरंत जांच कराई जा सके.

भारत में नेशनल सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के डायरेक्टर डॉ. सुजीत कुमार सिंह ने बीबीसी को बताया कि यह वायरस मर्स और सार्स वायरस की तरह जानवरों से ही आया है.

दस से बीस दिनों के भीतर ही यह वायरस 40 से 550 लोगों को संक्रमित कर चुका है. जो वायरस अब तक चीन तक ही सीमित था वो अब 5-6 देशों तक भी पहुंच चुका है.

वो कहते हैं, "यह वायरस अमरीका तक पहुंच चुका है तो हमारे देश के लोग भी चीन की यात्रा करते हैं. क़रीब 1200 मेडिकल स्टूडेंट चीन में पढ़ाई कर रहे हैं, जिसमें से ज़्यादातर वुहान प्रांत में ही हैं. ऐसे में अगर वो वहां से लौटते हैं तो इस वायरस के भारत में आ जाने की आशंका बहुत बढ़ जाती है."

f

Follow us on Social Media

India's Best Way to find Best Coaching Classes to Achieve your Goal