नर्सिंग कोर्स


एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Up to date Mon, 11 Might 2020 03:38 PM IST

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UP Board 2020: नर्सिंग कोर्स की तरफ युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। यह एक सम्मानजनक पेशा है जिसमें सेवा मूल भावना है। कोविड-19 महामारी के वक्त डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के प्रति लोगों के मन में सम्मान की भावना और ज्यादा मजबूत हुई है। डॉक्टर और नर्स इस वक्त जिस नि:स्वार्थ सेवा भाव से मरीजों की देखभाल में लगे हुए हैं, वह बेहद ही काबिले तारीफ है। दरअसल, नर्सिंग एक ऐसा पेशा है जिसकी सेवा भाव का मूल्य नहीं लगाया जा सकता है। जिस तरह डॉक्टर को समाज में भगवान का दर्जा प्राप्त है, उसी तरह नर्सों को भी बेहद सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। करियर के तौर पर नर्सिंग एक बेहतरीन विकल्प है। 12वीं के बाद लड़के और लड़कियां दोनों ही नर्सिंग क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं।

जानिए नर्सिंग में करियर के बारे में
इस क्षेत्र में महिलाओं के साथ ही पुरुष भी बड़ी संख्या में भागीदारी कर रहे हैं। नर्सिंग में कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं। इसके लिए न्यूनतम योग्यता बारहवीं पास रखी गई है। इस क्षेत्र में विद्यार्थी  डिग्री और डिप्लोमा, अंडर ग्रेजुएट एवं सर्टिफिकेट अनेक प्रकार के कोर्स कर सकते हैं। विद्यार्थी अपनी योग्यता और रुचि के हिसाब से कोर्स का चयन कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें-UP Board 2020: 12वीं पास युवाओं के लिए रोमांच से भरा करियर है मर्चेंट नेवी

विद्यार्थी नर्सिंग में बीएससी भी कर सकते हैं। इस कोर्स को बीएससी नर्सिंग कहा जाता है। इसके लिए अलावा जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिड्वाइफरी) और एएनएम (ऑग्ज़िल्यरी नर्सिंग मिड्वाइफ/हेल्थ वर्कर ) कोर्स भी कर सकते हैं। इन सभी का पाठ्यक्रमों की अवधि अलग-अलग होती है। जीएनएम कोर्स की अवधि तीन साल होती है।

 

नर्सिंग कोर्स के बाद नौकरी की संभावनाएं
नर्सिंग के बाद आप अस्पतालों में स्टाफ नर्स के तौर पर नियुक्त होते हैं। दो-तीन साल के अनुभव के बाद स्टाफ नर्स को वार्ड सिस्टर का पद प्राप्त होता है। नर्सिंग करने के बाद अभ्यर्थी सरकारी और निजी दोनों ही अस्पतालों में नौकरी पर लग सकते हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ ही कम्युनिटी हेल्थ नर्सेस, स्पेशल क्लिनिक व केयर सेंटर, स्कूल हेल्थ नर्सेस, इंडस्ट्रीयल नर्स और आर्म्ड फोर्सेस, ड्रग कंपनी और काउंसलिंग सेंटर में भी नौकरी कर सकते हैं। इतना ही नहीं अभ्यर्थी नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षक भी बन सकते हैं। सेना में भी नर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। कुल मिलाकर नर्सिंग में बेहतर करियर है और नौकरी की अपार संभावननाएं हैं।

नौकरी और वेतन
नर्सिंग का कोर्स अभ्यर्थी सरकारी और निजी दोनों ही कॉलेजों से कर सकते हैं। सरकारी कॉलेज से नर्सिंग कोर्स करने में कम खर्च आता है। सरकारी कॉलेज से अभ्यर्थी 30-40 हजार में नर्सिंग का कोर्स कर सकते हैं। जबकि निजी कॉलेजों में इस कोर्स का खर्च एक लाख से ऊपर आ सकता है। अन्य कोर्सों की तरह ही नर्सिंग के कोर्स में भी विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप मिलती है। पढ़ने में अच्छे विद्यार्थी इस कोर्स में स्कॉलरशिप प्राप्त कर सकते हैं। नर्सिंग में वेतन भी योग्यता के हिसाब से अलग-अलग मिलता है। नर्सिंग के कोर्स के बाद नए लोगों को प्रति महीना 10 हजार से लेकर 17 हजार रुपये तक वेतन मिलता है। जबकि अनुभव बढ़ने पर वेतन भी बढ़ता रहता है। नर्सिंग कोर्स के बाद अभ्यर्थी विदेश भी जा सकते हैं। 

UP Board 2020: नर्सिंग कोर्स की तरफ युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। यह एक सम्मानजनक पेशा है जिसमें सेवा मूल भावना है। कोविड-19 महामारी के वक्त डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के प्रति लोगों के मन में सम्मान की भावना और ज्यादा मजबूत हुई है। डॉक्टर और नर्स इस वक्त जिस नि:स्वार्थ सेवा भाव से मरीजों की देखभाल में लगे हुए हैं, वह बेहद ही काबिले तारीफ है। दरअसल, नर्सिंग एक ऐसा पेशा है जिसकी सेवा भाव का मूल्य नहीं लगाया जा सकता है। जिस तरह डॉक्टर को समाज में भगवान का दर्जा प्राप्त है, उसी तरह नर्सों को भी बेहद सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। करियर के तौर पर नर्सिंग एक बेहतरीन विकल्प है। 12वीं के बाद लड़के और लड़कियां दोनों ही नर्सिंग क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं।

जानिए नर्सिंग में करियर के बारे में

इस क्षेत्र में महिलाओं के साथ ही पुरुष भी बड़ी संख्या में भागीदारी कर रहे हैं। नर्सिंग में कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं। इसके लिए न्यूनतम योग्यता बारहवीं पास रखी गई है। इस क्षेत्र में विद्यार्थी  डिग्री और डिप्लोमा, अंडर ग्रेजुएट एवं सर्टिफिकेट अनेक प्रकार के कोर्स कर सकते हैं। विद्यार्थी अपनी योग्यता और रुचि के हिसाब से कोर्स का चयन कर सकते हैं।

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विद्यार्थी नर्सिंग में बीएससी भी कर सकते हैं। इस कोर्स को बीएससी नर्सिंग कहा जाता है। इसके लिए अलावा जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिड्वाइफरी) और एएनएम (ऑग्ज़िल्यरी नर्सिंग मिड्वाइफ/हेल्थ वर्कर ) कोर्स भी कर सकते हैं। इन सभी का पाठ्यक्रमों की अवधि अलग-अलग होती है। जीएनएम कोर्स की अवधि तीन साल होती है।

 



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